श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.268.3 
भीष्म उवाच
उभौ धर्मौ महाभागावुभौ परमदुश्चरौ।
उभौ महाफलौ तौ तु सद्भिराचरितावुभौ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! गृहस्थ धर्म और योग धर्म दोनों ही महान सौभाग्य देने वाले हैं। दोनों ही अत्यंत कठिन हैं। दोनों के फल महान हैं और दोनों का ही महापुरुषों ने अभ्यास किया है।"
 
Bhishma said, "O King! Both domestic life and the religion of yoga give great fortune. Both are extremely difficult. The fruits of both are great and both have been practised by great men.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)