श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.268.24 
पशवश्च मनुष्याश्च द्रुमाश्चौषधिभि: सह।
स्वर्गमेवाभिकांक्षन्ते न च स्वर्गस्ततो मखात्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
पशु, मनुष्य, वृक्ष और औषधियाँ - ये सभी स्वर्ग की इच्छा रखते हैं, परंतु वह विशाल स्वर्ग यज्ञ के अतिरिक्त किसी अन्य उपाय से प्राप्त नहीं हो सकता ॥24॥
 
Animals, human beings, trees and medicines – all of them desire heaven, but that vast heaven cannot be attained by any means other than sacrifice. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)