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एतच्चैवाभ्यनुज्ञातं पूर्वै: पूर्वतरैस्तथा।
को जातु न विचिन्वीत विद्वान् स्वां शक्तिमात्मन:॥ २३॥
अनुवाद
ये सभी पदार्थ पूर्वकालीन तथा उससे भी प्राचीन मनुष्यों द्वारा यज्ञ के अंग माने गए हैं। अतः कौन विद्वान् मनुष्य अपनी क्षमतानुसार अपने लिए कोई यज्ञ नहीं चुनेगा? 23.
All these substances have been accepted as a part of Yajna by the previous and even earlier men. So, which learned man will not choose any Yajna for himself according to his capacity? 23.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥