श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.268.22 
तदन्योन्यवरा: सर्वे प्राणिन: सप्त सप्तधा।
यज्ञेषूपाकृतं विश्वं प्राहुरुत्तमसंज्ञितम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सात प्रकार के ग्रामीण और वन्य प्राणी एक दूसरे से श्रेष्ठ हैं। इन सबमें 'उत्तम' नाम से विख्यात सभी पुरुष या मनुष्य भी यज्ञ के लिए नियुक्त कहे गए हैं। 22॥
 
The seven types of rural and forest animals are all superior to each other. Among all these, all the men or human beings known by the name 'Uttam' have also been said to have been appointed for the Yagya. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)