श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.268.2 
गार्हस्थ्यस्य च धर्मस्य योगधर्मस्य चोभयो:।
अदूरसम्प्रस्थितयो: किंस्विच्छ्रेय: पितामह॥ २॥
 
 
अनुवाद
दादाजी! गृहस्थ धर्म और योग धर्म एक-दूसरे से भिन्न नहीं हैं, परन्तु दोनों में श्रेष्ठ कौन है? कृपया मुझे यह बताइए॥ 2॥
 
Grandpa! The Dharma of domestic life and the Dharma of Yoga are not far from each other, but which of the two is the best? Please tell me this.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)