श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.268.19 
अजश्चाश्वश्च मेषश्च गौश्च पक्षिगणाश्च ये।
ग्राम्यारण्याश्चौषधय: प्राणस्यान्नमिति श्रुति:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
बकरी, घोड़ा, भेड़, गाय, पक्षी, ग्राम्य अन्न तथा वन्य अन्न आदि ये सभी वस्तुएँ आत्मा के लिए अन्न हैं - ऐसा श्रुतिका का कथन है।
 
Goat, horse, sheep, cow, bird, village food and wild food etc., all these things are food for the soul - this is the statement of the Shrutika.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)