श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.268.17 
यद्यत्र किंचित् प्रत्यक्षमहिंसाया: परं मतम्।
ऋते त्वागमशास्त्रेभ्यो ब्रूहि तद् यदि पश्यसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदि वेद और तत्संबंधी आगमों के अतिरिक्त अहिंसा से भिन्न हिंसा का प्रतिपादन करने वाले शास्त्रों का कोई परिणाम तर्क से भी प्रत्यक्ष प्रतीत होता हो अथवा तुम्हें उसका अनुभव हो रहा हो, तो उसे स्पष्ट रूप से मुझसे कहो ॥17॥
 
If, other than the Vedas and the corresponding Agamas, any result of the scriptures that advocate violence other than non-violence seems to be evident even by reasoning or you are experiencing it through experience, then tell me about it clearly. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)