श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.268.15 
एवं विदित्वा सर्वार्थानारभेतेति वैदिकम्।
नारभेतेति चान्यत्र नैष्ठिकी श्रूयते श्रुति:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा जानकर ही सब कर्म आरम्भ करने चाहिए, ऐसा वैदिक मत है। अन्यत्र यह सिद्धान्त-आधारित श्रुति सुनने को मिलती है कि किसी भी कर्म का आरम्भ नहीं करना चाहिए॥15॥
 
Knowing this, one should start all activities, this is the Vedic opinion. Elsewhere, we hear this principle-based Shruti that one should not start any activities at all.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)