Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.268.10: तपस्वी, धैर्यवान, वेद और विज्ञान के दर्शन करने वाले मुनिगण वेद को सनातन ज्ञान से युक्त ईश्वर की निःश्वासपूर्ण वाणी मानते हैं। 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.268.10 
तपस्विनो धृतिमन्त: श्रुतिविज्ञानचक्षुष:।
सर्वमार्षं हि मन्यन्ते व्याहृतं विदितात्मन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तपस्वी, धैर्यवान, वेद और विज्ञान के दर्शन करने वाले मुनिगण वेद को सनातन ज्ञान से युक्त ईश्वर की निःश्वासपूर्ण वाणी मानते हैं। 10॥
 
'Ascetic, patient, sages who have vision of Vedas and science, consider Vedas to be the breathless speech of God who is full of eternal knowledge. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)