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mahabharat 12.267.8: यदि उनमें से कोई ब्राह्मण की आज्ञा के विपरीत आचरण करे, तो ब्राह्मण राजा के पास जाकर कहे, ‘यह व्यक्ति मेरी बात नहीं मानता।’ तब राजा उस व्यक्ति को दण्ड दे।   |   mahabharat अध्याय 12.267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 267: द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.267.8 
यो यस्तेषामपचरेत् तमाचक्षीत वै द्विज:।
अयं मे न शृणोतीति तस्मिन् राजा प्रधारयेत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि उनमें से कोई ब्राह्मण की आज्ञा के विपरीत आचरण करे, तो ब्राह्मण राजा के पास जाकर कहे, ‘यह व्यक्ति मेरी बात नहीं मानता।’ तब राजा उस व्यक्ति को दण्ड दे।
 
If any of them behaves contrary to the orders of a brahmin, the brahmin should go to the king and say, 'This person does not listen to me.' Then the king should punish that person. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)