Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.267.35: सत्यवान! यदि प्रथम श्रेणी के अहिंसक दण्ड में धर्म और अधर्म का मिश्रण होने लगे, तो दण्ड देने वाले की आयु, बल और आयु को ध्यान में रखकर राजा को उचित दण्ड देने की आज्ञा देनी चाहिए ॥35॥ | mahabharat अध्याय 12.267: द्युमत्सेन और सत्यवान्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ प्रथमकल्पेन सत्यवन् संकरो भवेत्।
आयु: शक्तिं च कालं च निर्दिश्य तप आदिशेत्॥ ३५॥
अनुवाद
सत्यवान! यदि प्रथम श्रेणी के अहिंसक दण्ड में धर्म और अधर्म का मिश्रण होने लगे, तो दण्ड देने वाले की आयु, बल और आयु को ध्यान में रखकर राजा को उचित दण्ड देने की आज्ञा देनी चाहिए ॥35॥
'Satyawan! If the first class of non-violent punishment starts mixing Dharma and Adharma, then keeping in mind the age, strength and age of the person to be punished, the king should give orders for appropriate punishment. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥