Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.267.27: जो राजा स्वयं विषय-भोगों के लिए अपनी इन्द्रियों का दास है और अपने मन को वश में नहीं कर सकता, यदि वह दूसरों को नैतिक आचरण का उपदेश देने लगे, तो लोग उस पर हंसते हैं। 27. | mahabharat अध्याय 12.267: द्युमत्सेन और सत्यवान्का संवाद—अहिंसापूर्वक राज्यशासनकी श्रेष्ठताका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो राजा स्वयं विषय-भोगों के लिए अपनी इन्द्रियों का दास है और अपने मन को वश में नहीं कर सकता, यदि वह दूसरों को नैतिक आचरण का उपदेश देने लगे, तो लोग उस पर हंसते हैं। 27.
If a king who himself is a slave to his senses in order to enjoy sensual pleasures and cannot control his mind starts preaching moral conduct to others, people laugh at him. 27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥