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mahabharat 12.266.9: चिरकारी ने अपने स्वभाव के अनुसार, 'बहुत अच्छा' कहने में कुछ देर लगाई। वह जीर्ण-शीर्ण व्यक्ति था, अतः बहुत देर तक इस विषय में सोचता रहा॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.9 
स तथेति चिरेणोक्त्वा स्वभावाच्चिरकारिक:।
विमृश्य चिरकारित्वाच्चिन्तयामास वै चिरम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
चिरकारी ने अपने स्वभाव के अनुसार, 'बहुत अच्छा' कहने में कुछ देर लगाई। वह जीर्ण-शीर्ण व्यक्ति था, अतः बहुत देर तक इस विषय में सोचता रहा॥9॥
 
Chirakari, as was his nature, took some time to say, 'Very good'. He was a chronic person, so he kept thinking about it for a long time.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)