श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.266.8 
इत्युक्त्वा स तदा विप्रो गौतमो जपतां वर:।
अविमृश्य महाभागो वनमेव जगाम स:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस समय इस आज्ञा पर कुछ भी विचार न करके भगवान् का नाम जपने वालों में श्रेष्ठ महर्षि गौतम वन में चले गए ॥8॥
 
At that time, without giving any thought to this command, the great sage Gautama, the best amongst all those who chant the name of God, went to the forest. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)