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mahabharat 12.266.75: दीर्घकाल तक बड़ों की सेवा करो। दीर्घकाल तक उनके साथ रहो और उनकी पूजा करो (उनका आदर करो)। दीर्घकाल तक धर्म का आचरण करो और दीर्घकाल तक उसका अनुसंधान करो। 75.   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.75 
चिरं वृद्धानुपासीत चिरमन्वास्य पूजयेत्।
चिरं धर्मं निषेवेत कुर्याच्चान्वेषणं चिरम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
दीर्घकाल तक बड़ों की सेवा करो। दीर्घकाल तक उनके साथ रहो और उनकी पूजा करो (उनका आदर करो)। दीर्घकाल तक धर्म का आचरण करो और दीर्घकाल तक उसका अनुसंधान करो। 75.
 
Serve the elders for a long time. Be in their company for a long time and worship them (respect them). Practice Dharma for a long time and research it for a long time. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)