श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  12.266.73 
एवं सर्वेषु कार्येषु विमृश्य पुरुषस्तत:।
चिरेण निश्चयं कृत्वा चिरं न परितप्यते॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जो मनुष्य दीर्घकाल तक सब बातों पर विचार करके फिर किसी निर्णय पर पहुँचता है, उसे दीर्घकाल तक पश्चाताप नहीं करना पड़ता ॥ 73॥
 
In this manner, a person who after a long period of time ponders over all matters and then arrives at a decision does not have to repent for a long time. ॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)