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श्लोक  12.266.72 
एवं स गौतमस्तत्र प्रीत: पुत्रस्य भारत।
कर्मणा तेन कौरव्य चिरकारितया तथा॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
भरत! कुरुपुत्र! गौतम अपने पुत्र के कार्य में विलम्ब होने के कारण वहाँ बहुत प्रसन्न हुए।
 
Bharata! Son of Kuru! Gautama was very happy there due to the delay in the work done by his son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)