श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.266.70 
रागे दर्पे च माने च द्रोहे पापे च कर्मणि।
अप्रिये चैव कर्तव्ये चिरकारी प्रशस्यते॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जो काम, अभिमान, अहंकार, विश्वासघात, पापकर्मों में प्रवृत्त होने में तथा दूसरों को अप्रसन्न करने में विलम्ब करता है, उसकी प्रशंसा होती है। 70.
 
‘He who delays in giving in to passion, pride, arrogance, betrayal, sinful acts and in displeasing others is praised. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)