श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.266.7 
व्यभिचारे तु कस्मिंश्चिद् व्यतिक्रम्यापरान् सुतान्।
पित्रोक्त: कुपितेनाथ जहीमां जननीमिति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
एक दिन गौतम अपनी पत्नी के किसी व्यभिचार से क्रोधित होकर अपने अन्य पुत्रों को न बताकर चिरकारी से बोले - 'बेटा! तुम अपनी इस पापिनी माता को मार डालो।'
 
One day, Gautama being enraged at some adultery committed by his wife, instead of telling his other sons said to Chirakari - 'Son! You kill this sinful mother of yours.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)