श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.266.69 
चिरेण मित्रं बध्नीयाच्चिरेण च कृतं त्यजेत्।
चिरेण हि कृतं मित्रं चिरं धारणमर्हति॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
किसी से दोस्ती बहुत सोच-समझकर करनी चाहिए और बनाए गए दोस्त को अचानक नहीं छोड़ना चाहिए। अगर किसी को छोड़ने की नौबत आ जाए, तो उसके परिणामों के बारे में बहुत सोच-विचार कर लेना चाहिए। बहुत सोच-विचार करके बनाए गए दोस्त की दोस्ती ही लंबे समय तक चलती है।
 
One should make friendship with someone after thinking for a long time and one should not leave the friend one has made suddenly. If the need arises to leave someone, then one should think about its consequences for a long time. Only the friendship of a friend made after thinking for a long time lasts for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)