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mahabharat 12.266.67: बेटा चिरकारी! तुम्हारा कल्याण हो। तुम दीर्घायु और अमर रहो। सौम्य! यदि तुम दीर्घकाल तक इसी स्वभाव के बने रहो, तो मैं दीर्घकाल तक कभी दुःखी नहीं होऊँगा।॥67॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.67 
चिरकारिक भद्रं ते चिरकारी चिरं भव।
चिराय यदि ते सौम्य चिरमस्मि न दु:खित:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
बेटा चिरकारी! तुम्हारा कल्याण हो। तुम दीर्घायु और अमर रहो। सौम्य! यदि तुम दीर्घकाल तक इसी स्वभाव के बने रहो, तो मैं दीर्घकाल तक कभी दुःखी नहीं होऊँगा।॥67॥
 
'Son Chirakari! May you be blessed. May you remain long-lived and immortal. Soumya! If you remain of this nature for a long time, then I will never be sad for a long time.'॥ 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)