श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.266.66 
एवं स गौतम: पुत्रं प्रीतिहर्षगुणैर्युत:।
अभिनन्द्य महाप्राज्ञ इदं वचनमब्रवीत्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
महामते! इस प्रकार प्रेम और आनन्द से परिपूर्ण गौतम ने अपने पुत्र को नमस्कार करके यह कहा - 66॥
 
Mahamate! Thus, Gautama, filled with love and joy, greeted his son and said this - 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)