Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.63: जब महर्षि गौतम जप, ध्यान आदि आवश्यक कर्म करने के लिए बाहर गए थे, तब उनका पुत्र चिरकारी, यद्यपि हाथ में शस्त्र लिए खड़ा था, फिर भी वह अपनी माता की रक्षा के विषय में विनयपूर्वक विचार कर रहा था। इसी कारण उसे अपनी माता को मारने का जो आदेश मिला था, उसका पालन नहीं हो सका। 63. | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब महर्षि गौतम जप, ध्यान आदि आवश्यक कर्म करने के लिए बाहर गए थे, तब उनका पुत्र चिरकारी, यद्यपि हाथ में शस्त्र लिए खड़ा था, फिर भी वह अपनी माता की रक्षा के विषय में विनयपूर्वक विचार कर रहा था। इसी कारण उसे अपनी माता को मारने का जो आदेश मिला था, उसका पालन नहीं हो सका। 63.
When Maharishi Gautam went out to perform his necessary duties like chanting, meditation etc., his son Chirakari, although standing with a weapon in his hand, was still thinking humbly about the protection of his mother. That is why the order to kill his mother which he had received could not be carried out. 63.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥