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mahabharat 12.266.62: एकान्त वन में उस आश्रम में रहते हुए महामनस्वी गौतम ने कभी भी अपनी पत्नी और अपने तल्लीन पुत्र चिरकारी से अपने को अलग नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.62 
न हि सा तेन सम्भेदं पत्नी नीता महात्मना।
विजने चाश्रमस्थेन पुत्राश्चापि समाहित:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
एकान्त वन में उस आश्रम में रहते हुए महामनस्वी गौतम ने कभी भी अपनी पत्नी और अपने तल्लीन पुत्र चिरकारी से अपने को अलग नहीं किया।
 
Living in that hermitage in the solitary forest, the great-minded Gautama never separated himself from his wife and his engrossed son Chirakari. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)