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श्लोक  12.266.61 
गौतमस्तं ततो दृष्ट्वा शिरसा पतितं भुवि।
पत्नीं चैव निराकारां परामभ्यागमन्मुदम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
गौतम ने देखा कि चिरकारी सिर झुकाए भूमि पर लेटा हुआ है और उसकी पत्नी लज्जा के मारे स्थिर खड़ी है। यह देखकर उसे बहुत प्रसन्नता हुई।
 
Gautama saw that Chirakari was lying with his head bowed on the ground and his wife was standing motionless out of shame. He was very happy to see this. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)