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mahabharat 12.266.60: अपने पिता को उपस्थित देखकर चिरकारी अत्यन्त दुःखी हुआ। उसने अपने शस्त्र फेंककर उनके चरणों में सिर झुकाकर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न किया।   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.60 
चिरकारी तु पितरं दृष्ट्वा परमदु:खित:।
शस्त्रं त्यक्त्वा ततो मूर्ध्ना प्रसादायोपचक्रमे॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
अपने पिता को उपस्थित देखकर चिरकारी अत्यन्त दुःखी हुआ। उसने अपने शस्त्र फेंककर उनके चरणों में सिर झुकाकर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न किया।
 
Seeing his father present, Chirakari became very sad. Throwing away his weapons, he bowed his head at his feet and tried to please him. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)