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mahabharat 12.266.59: महाराज! इस प्रकार दुःखी होकर महर्षि गौतम घर लौटे और अपने पुत्र चिरकारी को अपने पास खड़ा देखा।   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.59 
एवं स दु:खितो राजन् महर्षिर्गौतमस्तदा।
चिरकारिं ददर्शाथ पुत्रं स्थितमथान्तिके॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इस प्रकार दुःखी होकर महर्षि गौतम घर लौटे और अपने पुत्र चिरकारी को अपने पास खड़ा देखा।
 
King! Thus saddened, Maharishi Gautama returned home and saw his son Chirakari standing beside him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)