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mahabharat 12.266.58: मेरा पुत्र चिरकारी दुःख या कष्ट होने पर भी काम टालने की आदत नहीं छोड़ता। हमारे मना करने पर भी वह देर तक सोता रहता है। आज हम दोनों माता-पिता का दुःख देखकर वह अवश्य ही चिरकारी हो जाएगा।॥58॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.58 
चिरायते च संतापाच्चिरं स्वपिति वारित:।
आवयोश्चिरसंतापादवेक्ष्य चिरकारिक:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
मेरा पुत्र चिरकारी दुःख या कष्ट होने पर भी काम टालने की आदत नहीं छोड़ता। हमारे मना करने पर भी वह देर तक सोता रहता है। आज हम दोनों माता-पिता का दुःख देखकर वह अवश्य ही चिरकारी हो जाएगा।॥58॥
 
‘My son Chirakari does not give up his habit of delaying work even when he is in pain or sorrow. He keeps sleeping for a long time even when we forbid him. Today, seeing the pain of both of us, his parents, he must surely become Chirakari.’॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)