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mahabharat 12.266.57: तुम्हारी माँ बहुत समय से तुम्हारे जन्म की प्रतीक्षा कर रही थी। उसने तुम्हें बहुत समय तक अपने गर्भ में धारण किया है, अतः पुत्र, तुम अमर हो! आज अपनी माँ का उद्धार करो और अपने अमरत्व को सफल करो। 57.   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.57 
चिरमाशंसितो मात्रा चिरं गर्भेण धारित:।
सफलं चिरकारित्वं कुरु त्वं चिरकारिक॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी माँ बहुत समय से तुम्हारे जन्म की प्रतीक्षा कर रही थी। उसने तुम्हें बहुत समय तक अपने गर्भ में धारण किया है, अतः पुत्र, तुम अमर हो! आज अपनी माँ का उद्धार करो और अपने अमरत्व को सफल करो। 57.
 
‘Your mother had been waiting for your birth for a long time. She has carried you in her womb for a long time, so son, you are immortal! Today, save your mother and make your immortality successful. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)