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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा
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श्लोक 56
श्लोक
12.266.56
सहजं चिरकारित्वमतिप्रज्ञतया तव।
सफलं तत् तथा तेऽस्तु भवाद्य चिरकारिक:॥ ५६॥
अनुवाद
‘अत्यन्त बुद्धिमान होने के कारण इस समय तुममें अमरत्व का जन्मजात गुण सफल हो। आज तुम सचमुच अमर हो जाओ॥ 56॥
‘Being extremely intelligent, the innate quality of being immortal may be successful in you at this time. Today, you must truly become immortal.॥ 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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