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mahabharat 12.266.55: ‘बेटा! आज विलम्ब करके तुम सचमुच अमर हो जाओ और मेरी, अपनी माता की तथा मेरे द्वारा की गई तपस्या की रक्षा करो। साथ ही अपने पापों से भी बच जाओ॥ 55॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.266.55 
त्राहि मां मातरं चैव तपो यच्चार्जितं मया।
आत्मानं पातकेभ्यश्च भवाद्य चिरकारिक:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! आज विलम्ब करके तुम सचमुच अमर हो जाओ और मेरी, अपनी माता की तथा मेरे द्वारा की गई तपस्या की रक्षा करो। साथ ही अपने पापों से भी बच जाओ॥ 55॥
 
‘Son! By delaying today, you should actually become immortal and save me, your mother and the penance I have done. Also save yourself from sins.॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)