Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.53: किन्तु मैंने तो उस उदार चिरकारी को उसकी माता का वध करने का आदेश दिया था। यदि उसने इस कार्य में विलम्ब करके अपना नाम सार्थक किया है, तो वही मुझे अपनी पत्नी-हत्या के पाप से बचा सकता है।' 53. | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्तरेण मयाऽऽज्ञप्तश्चिरकारीत्युदारधी:।
यद्यद्य चिरकारी स्यात् स मां त्रायेत पातकात्॥ ५३॥
अनुवाद
किन्तु मैंने तो उस उदार चिरकारी को उसकी माता का वध करने का आदेश दिया था। यदि उसने इस कार्य में विलम्ब करके अपना नाम सार्थक किया है, तो वही मुझे अपनी पत्नी-हत्या के पाप से बचा सकता है।' 53.
‘But I had ordered the generous Chirakari to kill his mother. If he has made his name worthwhile by delaying this task, then only he can save me from the sin of killing my wife. 53.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥