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हत्वा साध्वीं च नारीं च व्यसनित्वाच्च वासिताम्।
भर्तव्यत्वेन भार्यां च को नु मां तारयिष्यति॥ ५२॥
अनुवाद
जिसे मैंने पत्नी के रूप में अपने घर में आश्रय दिया था, जो एक पतिव्रता स्त्री थी और जो मेरी पत्नी होने के नाते मेरे भरण-पोषण की अधिकारी थी, उसे मैंने प्रमाद के व्यसन के वश में होकर मरवा दिया। अब मुझे इस पाप से कौन बचाएगा?
'The one whom I had given shelter in my house as my wife, who was a virtuous woman and who was entitled to my maintenance as my wife, I got her killed because I was under the influence of the addiction of negligence. Now who will save me from this sin?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥