Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.50: इस प्रकार न तो वह स्त्री दोषी है, न मैं दोषी हूँ और न ही वह देवराज इन्द्र जो ब्राह्मण वेश में आया था, दोषी है। धर्म के विषय में स्त्री का वध करने में मेरी जो लापरवाही हुई है, वही इस अपराध का मूल कारण है॥ 50॥ | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं न स्त्री न चैवाहं नाध्वगस्त्रिदशेश्वर:।
अपराध्यति धर्मस्य प्रमादस्त्वपराध्यति॥ ५०॥
अनुवाद
इस प्रकार न तो वह स्त्री दोषी है, न मैं दोषी हूँ और न ही वह देवराज इन्द्र जो ब्राह्मण वेश में आया था, दोषी है। धर्म के विषय में स्त्री का वध करने में मेरी जो लापरवाही हुई है, वही इस अपराध का मूल कारण है॥ 50॥
‘In this way neither the woman is guilty nor I am guilty nor is the king of gods Indra who came disguised as a traveller Brahmin guilty. The negligence of killing a woman in the matter of Dharma on my part is the root cause of this crime.॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥