श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.266.49 
परवानस्मि चेत्युक्त: प्रणयिष्यति तेन च।
अत्र चाकुशले जाते स्त्रिया नास्ति व्यतिक्रम:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
मैंने विनम्रतापूर्वक कहा, 'प्रभु! मैं आपके अधीन हूँ। आपकी उपस्थिति से मेरी रक्षा हो रही है।' मुझे आशा थी कि अतिथिदेव मेरे सद्व्यवहार से प्रसन्न होकर मुझ पर कृपा करेंगे; किन्तु इंद्र की वासना के कारण यहाँ एक दुःखद घटना घट गई। इसमें मेरी पत्नी का कोई दोष नहीं है।
 
I humbly said, 'Lord! I am under your control. I am protected by your presence.' I was hoping that the guest god would love me after being satisfied with my good behaviour; but a tragic incident happened here due to Indra's lust. My wife is not at fault in this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)