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mahabharat 12.266.44: विलम्ब करने की आदत के कारण चिरकारी इसी प्रकार सोचता रहा। इसी विचार में उसे बहुत समय व्यतीत हो गया। इसी बीच उसके पिता वन से लौट आए।   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.44 
एवं विमृशतस्तस्य चिरकारितया बहु।
दीर्घ:कालो व्यतिक्रान्तस्ततोऽस्याभ्यागमत् पिता॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
विलम्ब करने की आदत के कारण चिरकारी इसी प्रकार सोचता रहा। इसी विचार में उसे बहुत समय व्यतीत हो गया। इसी बीच उसके पिता वन से लौट आए।
 
Being of a habit of delaying, Chirakari kept thinking in this manner. A lot of time was spent in this thinking. Meanwhile his father returned from the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)