श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.266.43 
देवतानां समावायमेकस्थं पितरं विदु:।
मर्त्यानां देवतानां च स्नेहादभ्येति मातरम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष जानते हैं कि पिता एक ही स्थान पर स्थित सम्पूर्ण देवताओं का समूह है; किन्तु माता के अन्दर स्नेहवश सम्पूर्ण मनुष्यों और देवताओं का समूह रहता है (इसलिए माता की महिमा पिता से भी अधिक है)।॥ 43॥
 
‘Wise men know that the father is the group of all the gods situated at one place; but within the mother, due to her affection, resides the group of all humans and gods (therefore the glory of the mother is greater than that of the father).॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)