Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.42: ऐसा विचार करने पर, एक तो वह स्त्री होने के कारण अपरिग्रही है, दूसरे वह मेरी पूजनीय माता है। माता की महिमा पिता से भी अधिक है, जिसमें मेरी माता का आदर है। मूर्ख पशु भी स्त्री और माता को अपरिग्रही मानते हैं (फिर मैं बुद्धिमान होकर उसे कैसे मार सकता हूँ?)। | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं नारीं मातरं च गौरवे चाधिके स्थिताम्।
अवध्यां तु विजानीयु: पशवोऽप्यविचक्षणा:॥ ४२॥
अनुवाद
ऐसा विचार करने पर, एक तो वह स्त्री होने के कारण अपरिग्रही है, दूसरे वह मेरी पूजनीय माता है। माता की महिमा पिता से भी अधिक है, जिसमें मेरी माता का आदर है। मूर्ख पशु भी स्त्री और माता को अपरिग्रही मानते हैं (फिर मैं बुद्धिमान होकर उसे कैसे मार सकता हूँ?)।
‘Thinking like this, firstly she is inviolable because she is a woman, secondly she is my respected mother. The glory of a mother is greater than that of a father, in whom my mother is respected. Even foolish animals consider women and mothers to be inviolable (then how can I, being a wise man, kill her?).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥