श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.266.41 
यश्च नोक्तोऽथ निर्देश: स्त्रिया मैथुनतृप्तये।
तस्य स्मारयतो व्यक्तमधर्मो नास्ति संशय:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष स्त्री की कामवासना को तब भी जगाता है, जब वह मैथुन-सुख से तृप्त होने का कोई लक्षण भी नहीं दिखाती, वह स्पष्टतः पाप करता है। इसमें संशय नहीं है॥41॥
 
‘A man who arouses a woman's desire even when she has not shown any sign of being satisfied with the pleasure of sexual intercourse, clearly commits sin. There is no doubt about this. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)