श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.266.40 
नापराधोऽस्ति नारीणां नर एवापराध्यति।
सर्वकार्यापराध्यत्वान्नापराध्यन्ति चाङ्गना:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
ऐसे अवसरों पर स्त्रियाँ दोषी नहीं होतीं, पुरुष ही अपराधी होते हैं। स्त्रियाँ अपराध करने के लिए विवश होती हैं, क्योंकि वे सब कार्यों में दुर्बल होती हैं, अतः पराधीन होने के कारण वे अपराधी नहीं हैं।॥40॥
 
‘On such occasions it is not the women who are at fault, it is the men who are the culprits. Women are forced to commit crimes because they are weak in all tasks, hence they are not criminals because they are dependent.॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)