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mahabharat 12.266.4: कहते हैं कि महर्षि गौतम के चिरकारी नाम का एक अत्यन्त ज्ञानी पुत्र था। वह कर्तव्य-कर्म का ध्यान करके ही अपने सभी कार्यों को विलम्ब से करता था॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.266.4 
चिरकारी महाप्राज्ञो गौतमस्याभवत् सुत:।
चिरेण सर्वकार्याणि विमृश्यार्थान् प्रपद्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कहते हैं कि महर्षि गौतम के चिरकारी नाम का एक अत्यन्त ज्ञानी पुत्र था। वह कर्तव्य-कर्म का ध्यान करके ही अपने सभी कार्यों को विलम्ब से करता था॥4॥
 
It is said that Maharishi Gautam had a very knowledgeable son named Chirakari. He used to delay all his tasks after giving due consideration to the matters of duty.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)