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mahabharat 12.266.38: वास्तव में, स्त्री दोषी नहीं है, बल्कि पुरुष ही अपराधी है। पुरुष ही व्यभिचार का महापाप करता है, इसलिए वही अपराधी है।'   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.38 
एवं स्त्री नापराध्नोति नर एवापराध्यति।
व्युच्चरंश्च महादोषं नर एवापराध्यति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में, स्त्री दोषी नहीं है, बल्कि पुरुष ही अपराधी है। पुरुष ही व्यभिचार का महापाप करता है, इसलिए वही अपराधी है।'
 
‘In reality, the woman is not at fault, it is the man who commits the crime. It is the man who commits the great sin of adultery, therefore he is the culprit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)