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mahabharat 12.266.36: जब पुरुष विवाह करके तथा धर्म के मार्ग पर चलने का व्रत लेकर भी पराई स्त्रियों के पास जाते हैं (और उनके साथ बलात्कार करते हैं) तो इसके लिए स्त्रियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.36 
पाणिबन्धं स्वयं कृत्वा सह धर्ममुपेत्य च।
यदा यास्यन्ति पुरुषा: स्त्रियो नार्हन्ति वाच्यताम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब पुरुष विवाह करके तथा धर्म के मार्ग पर चलने का व्रत लेकर भी पराई स्त्रियों के पास जाते हैं (और उनके साथ बलात्कार करते हैं) तो इसके लिए स्त्रियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
 
When men, even after having married a wife and having taken a vow to follow the path of righteousness, go to other's women (and rape them), then the women cannot be blamed for this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)