श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.266.35 
माता जानाति यद्‍गोत्रं माता जानाति यस्य स:।
मातुर्भरणमात्रेण प्रीति: स्नेह: पितु: प्रजा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
संतान का वंश क्या है ? यह तो केवल माता ही जानती है। वह किसके पिता का पुत्र है ? यह भी केवल माता ही जानती है। माता ही बालक को अपने गर्भ में धारण करती है, इसलिए वह उस पर अधिक स्नेह और प्रेम रखती है। पिता का ही अपने बालक पर अधिकार होता है ॥ 35॥
 
‘What is the lineage of the child? This is known only to the mother. Whose father's son is he? This also is known only to the mother. The mother carries the child in her womb, therefore she has more affection and love for him. The father has only authority over his child.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)