Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.34: पति-पत्नी में मैथुन के समय सुयोग्य पुत्र की जो इच्छा होती है, वह यद्यपि पिता और माता दोनों में होती है, तथापि वास्तव में वह इच्छा माता में ही स्थित होती है।॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दम्पत्यो: प्राणसंश्लेषे योऽभिसंधि: कृत: किल।
तं माता च पिता चेति भूतार्थो मातरि स्थित:॥ ३४॥
अनुवाद
पति-पत्नी में मैथुन के समय सुयोग्य पुत्र की जो इच्छा होती है, वह यद्यपि पिता और माता दोनों में होती है, तथापि वास्तव में वह इच्छा माता में ही स्थित होती है।॥ 34॥
'The desire that a husband and wife have during sexual intercourse to have a capable son, though it is held by both the father and the mother, yet in reality that desire is established only in the mother.॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥