Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.266.33: वह बालक का पालन-पोषण करती है और सुश्रु नाम धारण करती है। माता हमारा सबसे निकटस्थ शरीर है। कोई भी चेतन मनुष्य, जिसका मन विचारशून्य हो गया है, अपनी माता को कभी नहीं मार सकता।॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.266.33 
शिशो: शुश्रूषणाच्छुश्रूर्माता देहमनन्तरम्।
चेतनावान् नरो हन्याद् यस्य नासुषिरं शिर:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वह बालक का पालन-पोषण करती है और सुश्रु नाम धारण करती है। माता हमारा सबसे निकटस्थ शरीर है। कोई भी चेतन मनुष्य, जिसका मन विचारशून्य हो गया है, अपनी माता को कभी नहीं मार सकता।॥33॥
 
‘She takes care of the child and takes the name Sushru. Mother is our closest body. No conscious person whose mind has become void of thoughts can ever kill his mother.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)