श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.266.32 
कुक्षिसंधारणाद् धात्री जननाज्जननी स्मृता।
अङ्गानां वर्धनादम्बा वीरसूत्वेन वीरसू:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
गर्भ में गर्भ धारण करने के कारण उसे धात्री कहते हैं, जन्म देने के कारण उसे जननी कहते हैं, शिशु का पालन-पोषण करने के कारण उसे अम्बा कहते हैं और वीर बालक को जन्म देने के कारण उसे वीरसु कहते हैं॥ 32॥
 
'She is called Dhatri because she carries the fetus in her womb, Janani because she gives birth, Amba because she nurtures the infant and Veersu because she gives birth to a heroic child.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)