Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.31: ‘माता के समान कोई दूसरी छाया नहीं है, अर्थात् माता की छत्रछाया में जो सुख मिलता है, वह अन्यत्र नहीं मिलता। माता के समान कोई दूसरा सहारा नहीं है, माता के समान कोई दूसरा रक्षक नहीं है और पुत्र को माता से अधिक प्रिय कोई वस्तु नहीं है।॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘माता के समान कोई दूसरी छाया नहीं है, अर्थात् माता की छत्रछाया में जो सुख मिलता है, वह अन्यत्र नहीं मिलता। माता के समान कोई दूसरा सहारा नहीं है, माता के समान कोई दूसरा रक्षक नहीं है और पुत्र को माता से अधिक प्रिय कोई वस्तु नहीं है।॥31॥
‘There is no other shadow like that of a mother, i.e. the happiness that is found under the umbrella of a mother is not found anywhere else. There is no other support like that of a mother, there is no other protector like that of a mother and there is no other thing dearer to a child than his mother.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥