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mahabharat 12.266.30: जब कोई व्यक्ति अपनी मां से अलग हो जाता है तो वह अपने आप को बूढ़ा समझने लगता है, दुखी हो जाता है और उसे सारी दुनिया सूनी लगने लगती है।   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.30 
तदा स वृद्धो भवति तदा भवति दु:खित:।
तदा शून्यं जगत‍् तस्य यदा मात्रा वियुज्यते॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब कोई व्यक्ति अपनी मां से अलग हो जाता है तो वह अपने आप को बूढ़ा समझने लगता है, दुखी हो जाता है और उसे सारी दुनिया सूनी लगने लगती है।
 
'When a person is separated from his mother, he begins to think of himself as old, becomes sad and the entire world appears desolate to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)