Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.3: चिरकारी! तेरा कल्याण हो। चिरकारी! तेरा कल्याण हो। चिरकारी बहुत बुद्धिमान है। चिरकारी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए कभी अपराध नहीं करता।' (यह बात उसके पिता ने चिरकारी की प्रशंसा करते हुए कही थी)॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चिरकारिक भद्रं ते भद्रं ते चिरकारिक।
चिरकारी हि मेधावी नापराध्यति कर्मसु॥ ३॥
अनुवाद
चिरकारी! तेरा कल्याण हो। चिरकारी! तेरा कल्याण हो। चिरकारी बहुत बुद्धिमान है। चिरकारी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए कभी अपराध नहीं करता।' (यह बात उसके पिता ने चिरकारी की प्रशंसा करते हुए कही थी)॥3॥
'Chirkari! May you be blessed. Chirkari! May you be blessed. Chirkari is very intelligent. Chirkari never commits a crime in discharging his duties.' (This was said by his father while praising Chirkari)॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥